Navratri 2026: नवरात्रि में इन 8 बातों का रखें ध्यान, जानें किन कार्यों से बचने की मान्यता

शारदीय नवरात्रि को देवी उपासना का महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस दौरान नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार व्रत रखते हैं और घरों व मंदिरों में विशेष पूजा-पाठ किया जाता है। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026 से होने जा रही है।

नवरात्रि के दौरान खानपान, स्वच्छता और दैनिक दिनचर्या से जुड़े कई नियमों का पालन करने की परंपरा है। हालांकि, इन मान्यताओं में क्षेत्र, परिवार और धार्मिक परंपरा के अनुसार अंतर हो सकता है। आइए जानते हैं नवरात्रि के दौरान किन 8 बातों से बचने की धार्मिक मान्यता प्रचलित है।

1. नाखून काटने से जुड़ी मान्यता
कई परंपराओं में नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान नाखून काटने से बचने की सलाह दी जाती है। इसे व्रत और साधना के दौरान संयम व शुद्धता से जोड़कर देखा जाता है।

2. अखंड ज्योति को अकेला न छोड़ें
यदि घर में अखंड ज्योति स्थापित की गई है तो उसकी नियमित निगरानी करने की परंपरा है। मान्यता के अनुसार दीपक को ऐसी जगह रखना चाहिए, जहां उसकी देखभाल आसानी से की जा सके और वह अनजाने में बुझ न जाए।

3. सात्विक भोजन को प्राथमिकता
व्रत रखने वाले श्रद्धालु आमतौर पर सात्विक और फलाहार का सेवन करते हैं। इस दौरान प्याज, लहसुन और मांसाहारी भोजन से परहेज करने की परंपरा कई परिवारों में है। व्रत में फल, दूध, कुट्टू, सिंघाड़े और अन्य फलाहारी सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है।

4. स्वच्छता का रखें विशेष ध्यान
नवरात्रि में पूजा-पाठ के दौरान साफ कपड़े पहनने और पूजा स्थल को स्वच्छ रखने पर जोर दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं में शारीरिक और आसपास की स्वच्छता को साधना का हिस्सा माना गया है।

5. चमड़े की वस्तुओं से दूरी की परंपरा
कुछ धार्मिक परंपराओं में व्रत के दौरान चमड़े से बनी वस्तुओं का इस्तेमाल न करने की सलाह दी जाती है। जूते, बेल्ट और बैग जैसी वस्तुओं को लेकर यह मान्यता कुछ परिवारों में देखने को मिलती है। इसका पालन व्यक्तिगत आस्था और परंपरा पर निर्भर करता है।

6. नींबू काटने को लेकर अलग-अलग मान्यताएं
नवरात्रि में नींबू काटने से बचने की मान्यता भी कुछ स्थानों और परिवारों में प्रचलित है। हालांकि, यह सभी धार्मिक परंपराओं में समान रूप से लागू नहीं है, इसलिए इसे केवल एक मान्यता के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

7. अनाज और सामान्य नमक से परहेज
व्रत रखने वाले लोग कई घरों में नवरात्रि के दौरान गेहूं, चावल और अन्य अनाज का सेवन नहीं करते। इसके स्थान पर फलाहार किया जाता है। सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक इस्तेमाल करने की परंपरा भी प्रचलित है।

8. दिन में सोने से बचने की परंपरा
नवरात्रि व्रत के दौरान दिन में अधिक सोने से बचने की धार्मिक मान्यता है। इसे साधना में अनुशासन और एकाग्रता से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, थकान या स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकता होने पर पर्याप्त आराम करना जरूरी है।

परंपरा के अनुसार अलग हो सकते हैं नियम

नवरात्रि से जुड़े नियम और मान्यताएं हर क्षेत्र, परिवार और धार्मिक परंपरा में एक जैसी नहीं होतीं। इसलिए ऊपर बताई गई बातों को धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के रूप में समझना चाहिए। व्यक्ति अपनी आस्था, पारिवारिक परंपरा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए इनका पालन कर सकता है।

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