धमधा – किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर किसान बंधु संगठन, धमधा ब्लॉक के नेतृत्व में आंदोलन कर रहे सैकड़ों किसान और महिलाएं 8 अक्टूबर 2026 को रायपुर पहुंचे। मुख्यमंत्री निवास में अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपने निकले किसानों को रास्ते में पथरिया चौक, मुरमूंदा और रायपुर के कबीर चौक के पास पुलिस प्रशासन ने रोक दिया। इस दौरान मौके पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। बड़ी संख्या में पुलिस जवान तैनात रहे, वहीं वाटर कैनन भी मौके पर मौजूद रही।
मुख्यमंत्री निवास तक पहुंचकर ओएसडी (विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी) को ज्ञापन सौंपने की मांग पर अड़े किसानों ने अंततः अपना आवेदन दीवार पर चस्पा कर दिया। इसके साथ ही किसानों ने ऐलान किया कि यदि उनकी मांगों का 14 दिवस के भीतर निराकरण नहीं किया गया, तो वे पुनः मुख्यमंत्री के पास पहुंचकर अपनी समस्याओं को रखेंगे।
33 दिनों से क्रमिक भूख हड़ताल पर किसान
किसान बंधु संगठन, धमधा ब्लॉक के नेतृत्व में किसान पिछले 33 दिनों से क्रमिक भूख हड़ताल कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि पूर्व में मुख्यमंत्री निवास में प्रतिनिधिमंडल द्वारा ज्ञापन सौंपे जाने के बाद भी उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण किसानों ने दोबारा रायपुर कूच कर शासन तक अपनी बात पहुंचाने का निर्णय लिया।
किसानों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी समस्याओं के समाधान के लिए शासन और मुख्यमंत्री से आग्रह कर रहे हैं। इसके बावजूद अपेक्षित समाधान नहीं मिलने के कारण उन्हें आंदोलन जारी रखना पड़ रहा है।
रास्ते में कई जगह रोका गया किसानों का काफिला
8 अक्टूबर को सैकड़ों किसान और महिलाएं अपनी मांगों को लेकर रायपुर की ओर रवाना हुए। किसानों के अनुसार, रास्ते में पुलिस प्रशासन ने पथरिया चौक और मुरमूंदा में उनके काफिले को रोका। इसके बाद रायपुर में कबीर चौक के पास भी किसानों को आगे बढ़ने से रोक दिया गया।
मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस जवान तैनात थे और वाटर कैनन की व्यवस्था भी की गई थी। किसान मुख्यमंत्री निवास तक पहुंचकर ओएसडी को ज्ञापन सौंपना चाहते थे, ताकि उनकी मांगें शासन तक सीधे पहुंच सकें।
तहसीलदार ज्ञापन लेने पहुंचे, ओएसडी को ही देने की मांग पर अड़े किसान
किसानों के बीच ज्ञापन लेने के लिए तहसीलदार पहुंचे। प्रशासन की ओर से ज्ञापन लेने की पहल की गई, लेकिन किसान मुख्यमंत्री निवास के ओएसडी को ही आवेदन सौंपने की मांग पर अड़े रहे।
किसानों का कहना था कि वे पहले भी ज्ञापन सौंप चुके हैं और इस बार अपनी मांगों को सीधे मुख्यमंत्री निवास तक पहुंचाना चाहते हैं। ज्ञापन सौंपने को लेकर सहमति नहीं बनने पर किसानों ने अंततः अपना आवेदन दीवार पर चस्पा कर दिया।
बाबा टेक सिंह चंदेल बोले—लगातार मुख्यमंत्री से कर रहे हैं आग्रह
किसान नेता बाबा टेक सिंह चंदेल ने कहा कि किसानों की मांगों को लेकर हम निरंतर मुख्यमंत्री से आग्रह कर रहे हैं, लेकिन अब तक समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। किसान पिछले 33 दिनों से क्रमिक भूख हड़ताल कर अपनी मांगों को शासन तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। इसके बावजूद किसानों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि हमारी मांगें किसी एक किसान या एक गांव तक सीमित नहीं हैं। बैंक ऋण में राहत, पात्र किसानों को वन टाइम सेटलमेंट (OTS) का लाभ और बैंक ऋण के कारण कुर्क एवं नीलाम की गई कृषि भूमि वापस दिलाने जैसी समस्याएं किसानों के भविष्य से जुड़ी हुई हैं। वहीं ग्राम परसबोड़ में घरों के सामने लगे ट्रांसफार्मरों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करना और ग्राम खैरझिटी के शासकीय स्कूल में नियमित शिक्षक की व्यवस्था करना भी जनहित के महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।
बाबा टेक सिंह चंदेल ने कहा कि हम लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात शासन और मुख्यमंत्री तक पहुंचाना चाहते हैं। इसी उद्देश्य से सैकड़ों किसान और महिलाएं रायपुर पहुंचे, लेकिन किसानों को रास्ते में पथरिया चौक, मुरमूंदा और कबीर चौक के पास रोका गया। मुख्यमंत्री निवास में ओएसडी को ज्ञापन सौंपने की मांग पर किसान अड़े रहे। जब ज्ञापन सौंपने की बात नहीं बनी, तो किसानों ने अपना आवेदन दीवार पर चस्पा कर दिया।
उन्होंने आगे कहा कि किसानों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि उनकी समस्याओं का ठोस समाधान चाहिए। किसानों ने शासन को 14 दिवस का समय दिया है। इस अवधि में मांगों का निराकरण नहीं होने पर किसान एक बार फिर मुख्यमंत्री के पास पहुंचकर अपनी बात रखेंगे। उन्होंने कहा कि किसानों के हक और अधिकारों की लड़ाई शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगी, जब तक उनकी मांगों पर निर्णय नहीं हो जाता।
किसानों की प्रमुख मांगें
किसानों की प्रमुख मांगों में पात्र किसानों को बैंक ऋण में ऋणमाफी अथवा ब्याज में छूट प्रदान करना और वन टाइम सेटलमेंट (OTS) का लाभ दिलाना शामिल है। इसके अलावा बैंक ऋण के कारण कुर्क एवं नीलाम की गई पात्र किसानों की कृषि भूमि वापस दिलाने की मांग भी उठाई गई है।
किसानों का कहना है कि बैंक ऋण से जुड़ी समस्याओं के कारण कई किसान आर्थिक परेशानी का सामना कर रहे हैं। ऐसे में शासन को मामले में हस्तक्षेप कर पात्र किसानों को राहत दिलाने की दिशा में ठोस पहल करनी चाहिए।
परसबोड़ में ट्रांसफार्मर शिफ्टिंग और 76 हजार रुपये के डिमांड नोट का मुद्दा
किसानों ने ग्राम परसबोड़ में घरों के सामने लगे ट्रांसफार्मरों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग भी उठाई है। ग्रामीणों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ट्रांसफार्मरों को उचित स्थान पर शिफ्ट करने की मांग की जा रही है।
इसके साथ ही ट्रांसफार्मर शिफ्टिंग के लिए जारी लगभग 76 हजार रुपये के डिमांड नोट का भार किसानों पर नहीं डालने की मांग की गई है। किसानों का कहना है कि इस मामले का समाधान संबंधित विभाग और शासन के स्तर पर किया जाना चाहिए, ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके।
खैरझिटी के शासकीय स्कूल में नियमित शिक्षक की मांग
किसानों के ज्ञापन में ग्राम खैरझिटी के शासकीय स्कूल में स्थायी एवं नियमित शिक्षक की व्यवस्था करने का मुद्दा भी शामिल है। किसानों का कहना है कि स्कूल में शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
उनकी मांग है कि बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए स्कूल में नियमित शिक्षक की व्यवस्था की जाए, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिल सकें।
14 दिन में समाधान नहीं तो फिर मुख्यमंत्री के पास जाएंगे किसान
रायपुर में अपनी मांगों को लेकर पहुंचे किसानों ने स्पष्ट किया है कि उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक समस्याओं का उचित समाधान नहीं हो जाता। किसान नेता बाबा टेक सिंह चंदेल के अनुसार, किसानों की मांगों को लेकर लगातार मुख्यमंत्री से आग्रह किया जा रहा है और अब शासन को इन मुद्दों पर ठोस निर्णय लेना चाहिए।
किसानों ने 14 दिवस के भीतर मांगों का निराकरण करने की मांग करते हुए कहा है कि यदि निर्धारित अवधि में समाधान नहीं हुआ, तो वे फिर से मुख्यमंत्री के पास पहुंचेंगे।
अब देखना होगा कि किसानों द्वारा दी गई समय-सीमा के भीतर शासन और संबंधित विभाग क्या कदम उठाते हैं तथा 33 दिनों से जारी क्रमिक भूख हड़ताल के बाद किसानों की समस्याओं का समाधान कब तक हो पाता है।


