रायपुर। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और समग्र मूल्यांकन की दिशा में छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने नई पहल शुरू की है। मंडल द्वारा Holistic Progress Card (HPC) को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए 17 से 19 सितंबर 2026 तक राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला आयोजित की जा रही है।
तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के 33 जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों और पायलट प्रोजेक्ट के लिए चयनित स्कूलों के प्राचार्यों को HPC की प्रक्रिया और उपयोगिता की जानकारी दी जा रही है। प्रतिदिन 11-11 जिलों के अधिकारियों और प्रत्येक जिले से चयनित तीन-तीन हायर सेकेंडरी स्कूलों के प्राचार्यों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
केवल अंकों से नहीं होगा मूल्यांकन
HPC का उद्देश्य विद्यार्थियों की प्रगति को केवल परीक्षा में मिले अंकों तक सीमित नहीं रखना है। इसमें बच्चे की ज्ञानात्मक, भावनात्मक, सामाजिक-भावनात्मक और मनोप्रेरक क्षमताओं के साथ उसके व्यवहार और सीखने की आदतों का भी आकलन किया जाएगा।
प्रशिक्षण में अधिकारियों को बताया गया कि विद्यार्थी की समस्या समाधान क्षमता, समय प्रबंधन, समूह में काम करने की क्षमता और स्वयं का मूल्यांकन करने जैसे पहलुओं को भी प्रगति रिपोर्ट में शामिल किया जा सकता है।
360 डिग्री प्रोग्रेस रिपोर्ट की अवधारणा
HPC को विद्यार्थी की 360 डिग्री प्रोग्रेस रिपोर्ट के रूप में देखा जा रहा है। इसमें यह समझने का प्रयास होगा कि विद्यार्थी किसी विषय में कितने अंक हासिल करता है, इसके साथ वह समस्याओं का समाधान कैसे करता है, दूसरों के साथ किस तरह काम करता है और अपनी भावनाओं व व्यवहार को किस प्रकार संभालता है।
कार्यशाला में प्रोजेक्ट और लघु शोध के माध्यम से समस्या समाधान कौशल के आकलन, समूह गतिविधियों के जरिए सामाजिक क्षमता की पहचान तथा शिक्षक-विद्यार्थी संवाद के अवलोकन से जुड़े तरीकों की जानकारी दी गई।
स्व-मूल्यांकन पर भी जोर
HPC में विद्यार्थियों के स्व-मूल्यांकन को भी महत्व दिया जाएगा। इसके माध्यम से विद्यार्थी अपनी क्षमताओं, उपलब्धियों और सुधार की जरूरत वाले क्षेत्रों को खुद समझने का प्रयास कर सकेंगे।
राज्य स्तरीय प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य चयनित स्कूलों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले अधिकारियों और प्राचार्यों को मूल्यांकन की प्रक्रिया से परिचित कराना है। पायलट प्रोजेक्ट से मिलने वाले अनुभवों के आधार पर आगे इस व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।


