रायपुर / 💍 विवाह मुहूर्त — नवंबर से दिसंबर 2025 तक
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष देवउठनी एकादशी के बाद विवाह के लिए निम्न प्रमुख तिथियाँ शुभ मानी जा रही हैं:
| माह | शुभ विवाह तिथियाँ (2025) |
|---|---|
| नवंबर | 5, 8, 10, 12, 17, 18, 22, 24, 27 |
| दिसंबर | 1, 5, 7, 9, 11, 13, 15 |
इन तिथियों में विवाह, सगाई और गृह प्रवेश जैसे कार्य करना शुभ फलदायी रहेगा।
🌿 देवउठनी एकादशी का धार्मिक महत्व
पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु चातुर्मास के दौरान योगनिद्रा में रहते हैं। इस अवधि में कोई भी बड़ा मांगलिक कार्य नहीं किया जाता।
जैसे ही देवउठनी एकादशी आती है, विष्णु भगवान जागते हैं और सृष्टि के कार्यों का पुनः संचालन आरंभ करते हैं।
इस दिन तुलसी विवाह के साथ ही शुभ कार्यों की पुनः शुरुआत मानी जाती है।
🪔 भक्तों में उल्लास का वातावरण है। मंदिरों में तुलसी विवाह की तैयारियाँ जोरों पर हैं, और पंडालों में मंगल गीतों की गूंज सुनाई दे रही है। अब श्रद्धालु और परिवारजन विवाह समारोहों की योजना बनाना शुरू कर चुके हैं।, 2 नवंबर 2025:
आज देवउठनी एकादशी के पावन अवसर पर पूरे देश में श्रद्धालु भगवान विष्णु और माता तुलसी के जागरण का पर्व मना रहे हैं। यह दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी के साथ चार महीने से रुके हुए सभी मांगलिक कार्यों की शुरुआत मानी जाती है।
पंडितों के अनुसार, इस वर्ष देवउठनी एकादशी 2 नवंबर 2025, शनिवार को है। शाम के समय भगवान विष्णु (शालिग्राम) और माता तुलसी का विवाह संस्कार संपन्न किया जाएगा, जिसे तुलसी विवाह कहा जाता है। इसके साथ ही विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, यज्ञोपवित और अन्य शुभ कार्यों की पुनः शुरुआत का संकेत मिलता है।

“देवउठनी एकादशी की संध्या के बाद से ही शुभ कार्य करना प्रारंभ किया जा सकता है।
3 नवंबर 2025 (रविवार) से विवाह और मांगलिक कार्यों के मुहूर्त पुनः शुरू होंगे।”
पं. रुपेंद्र जोशी जी ,ज्योतिषाचार्य धमधा
💍 विवाह मुहूर्त — नवंबर से दिसंबर 2025 तक
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष देवउठनी एकादशी के बाद विवाह के लिए निम्न प्रमुख तिथियाँ शुभ मानी जा रही हैं:
| माह | शुभ विवाह तिथियाँ (2025) |
|---|---|
| नवंबर | 5, 8, 10, 12, 17, 18, 22, 24, 27 |
| दिसंबर | 1, 5, 7, 9, 11, 13, 15 |
इन तिथियों में विवाह, सगाई और गृह प्रवेश जैसे कार्य करना शुभ फलदायी रहेगा।
🌿 देवउठनी एकादशी का धार्मिक महत्व
पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु चातुर्मास के दौरान योगनिद्रा में रहते हैं। इस अवधि में कोई भी बड़ा मांगलिक कार्य नहीं किया जाता।
जैसे ही देवउठनी एकादशी आती है, विष्णु भगवान जागते हैं और सृष्टि के कार्यों का पुनः संचालन आरंभ करते हैं।
इस दिन तुलसी विवाह के साथ ही शुभ कार्यों की पुनः शुरुआत मानी जाती है।


