यह एक ऑनलाइन फ्रॉड है जिसमें स्कैमर्स (धोखेबाज़) पुलिस, CBI, कोर्ट या किसी सरकारी एजेंसी के अफ़सर बनकर लोगों को डराते हैं।
दुर्ग पुलिस ने “डिजिटल अरेस्ट स्कैम” के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की है। हाल ही में, दुर्ग पुलिस ने साइबर अपराधों के शिकार हुए नागरिकों को ₹1.93 करोड़ की राशि वापस दिलाई है। इनमें से ₹10.8 लाख डिजिटल अरेस्ट स्कैम से संबंधित थे। यह राशि 100 से अधिक मामलों में पीड़ितों को लौटाई गई। पुलिस ने बताया कि समय पर शिकायत करने से धन की वसूली में मदद मिलती है। एसएसपी विजय अग्रवाल ने नागरिकों से डिजिटल सतर्कता बनाए रखने और संदिग्ध कॉल्स से बचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि धोखाधड़ी की शिकायतें तुरंत हेल्पलाइन 1930 पर दर्ज करानी चाहिए। Cyber Deepak Yadav
डिजिटल अरेस्ट स्कैम क्या है?

यह एक ऑनलाइन धोखाधड़ी है जिसमें अपराधी खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताकर पीड़ितों को डराते हैं। वे कहते हैं कि उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स या अन्य गंभीर आरोप हैं। फिर वे वीडियो कॉल पर पीड़ित को घंटों तक रखते हैं और पैसे की मांग करते हैं। यह स्कैम विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाता है।
कैसे बचें?
- कभी भी अनजान कॉल्स या वीडियो कॉल्स का जवाब न दें।
- किसी भी सरकारी एजेंसी से संबंधित होने का दावा करने वाले से व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें।
- यदि कोई कॉल आपको डराने या पैसे मांगने की कोशिश करे, तो तुरंत फोन काटें और 1930 पर शिकायत दर्ज करें।
- संदिग्ध लिंक या ऐप्स से दूर रहें।
सारांश: दुर्ग पुलिस डिजिटल अरेस्ट स्कैम के खिलाफ सक्रिय रूप से काम कर रही है और नागरिकों को जागरूक कर रही है। समय पर शिकायत करने से धोखाधड़ी की राशि की वसूली संभव है। नागरिकों से अपील है कि वे सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की रिपोर्ट तुरंत करें।

